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यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का सही सà¥à¤¤à¤° कितना होना चाहिà¤? कब हो जाता है यह खतरनाक, जानें
यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ किडनी से होकर यूरिन के रासà¥à¤¤à¥‡ बाहर निकल जाता है.
Uric Acid Symptoms: हर जीव को जीवित रहने के लिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ की जरूरत होती है. à¤à¥‹à¤œà¤¨ शरीर में जाता है और उससे आवशà¥à¤¯à¤• पोषत ततà¥à¤µ निकालकर शरीर अपने इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाता है. à¤à¥‹à¤œà¤¨ से पोषक ततà¥à¤µ को निकालने के दौरान हमारी बॉडी शरीर से कई अवशिषà¥à¤Ÿ पदारà¥à¤¥ या बेकार पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकाल देती है. लेकिन जब इन बेकार पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाठतो यह शरीर के अंदर ही रह जाते हैं. डाइट में पà¥à¤¯à¥‚रिन वाले फूड बॉडी में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करते हैं. पà¥à¤¯à¥‚रिन जब टूटने लगता है तो इसे यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बन जाता है. शरीर के अंदर कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं के दौरान à¤à¥€ यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बाय पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ के रूप में बनता है. आमतौर पर यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पेशाब के रासà¥à¤¤à¥‡ शरीर से बाहर निकल जाता है. लेकिन शरीर में पà¥à¤¯à¥‚रिन की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने या कà¥à¤› अंदरà¥à¤¨à¥€ गड़बड़ियों के बाद यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ खून में बढ़ने लगती है. इस कारण यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤² के रूप में हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जोड़ों में जमा होने लगता है. तो आइठजानते हैं कि खून में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ कितनी होनी चाहिà¤.
मेडिकल नà¥à¤¯à¥‚ज टूडे के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• महिला और पà¥à¤°à¥à¤· में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की अलग-अलग मातà¥à¤°à¤¾ होती है. यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का महिलाओं में नॉरà¥à¤®à¤² सà¥à¤¤à¤° 1.5 से 6.0 mg/dL होता है जबकि पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में 2.4 से 7.0 mg/dL होनी चाहिà¤. जब यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का सà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में 7.0 mg/dL से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाठतो यह शरीर के लिठबहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरनाक हो जाता है. इसी तरह महिलाओं में 6.0 mg/dL से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाठतो इससे कई तरह के नà¥à¤•सान हो सकते हैं. वहीं अगर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ 2.5 mg/d से कम हो और महिलाओं में 1.5 mg/d से कम हो तो इसे à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ नहीं माना जाता है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शरीर की कà¥à¤› जरूरी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं के लिठयूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की à¤à¤¾à¤—ीदारी जरूरी है.
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बनने के कारण
हालांकि हमेशा किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में बढ़े हà¥à¤ यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के कारण का पता नहीं चल पाता है लेकिन आमतौर पर इसके लिठजेनेटिक, हेलà¥à¤¥ और खान-पान जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होते हैं. जब खून में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बढ़ जाठतो इस बीमारी को हाइपरयूरीसीमिया कहते हैं. अगर माता-पिता में किसी को पहले से यह बीमारी हो तो उसके बचà¥à¤šà¥‡ में à¤à¥€ यह बीमारी होने का जोखिम है. इसके अलावा à¤à¤¸à¥‡ फूड जिससे पà¥à¤¯à¥‚रिन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बनता है, उससे à¤à¥€ यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बन सकता है. तीसरा कारण है कà¥à¤› बीमारियां, जिनमें यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बढ़ जाता है. खान-पान में रेड मीट, सी फूड, कà¥à¤› मछलियां, पोलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ, शà¥à¤—री पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ आदि के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन से à¤à¥€ यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ बढ़ जाता है. इसलिठइन चीजों का सेवन बहà¥à¤¤ कम करना चाहिà¤.
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